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घमंडी तितली की कहानी और तितली का संघर्ष

 घमंडी तितली की कहानी

बच्चों आज मैं तुम्हें घमंडी तितली की कहानी सुनाने जा रहा हूं। एक जमाने में एक बाग में एक बहुत ही सुंदर तितली रहती थी। सभी उसे तितली रानी तितली रानी कहकर बुलाते थे। तितली बहुत सुंदर थी इसीलिए वह बहुत घमंडी भी थी। उसका सारा समय सजने सवरने में ही गुजर जाता था और वह मन ही मन बहुत खुश रहती थी। 

वह रोज सुबह से ही सजने सवरने में लग जाती और उसके बाद घूमने के लिए बाग में निकल जाती। तितली इतनी सुंदर थी कि कोई उसकी प्रशंसा किए बगैर रह नहीं पाता था, लेकिन उसमें एक कमी यह थी कि वह किसी से अच्छे से बात नहीं करती थी। उसकी अंदर बहुत घमंड था। इसीलिए यह घमंडी तितली कि कहानी  है 

एक दिन वह बाग में घूम रही थी और मस्ती कर रही थी। तभी तोते ने उसका रास्ता रोका और कहा, तितली रानी आप हमारी बात मान लो। कभी हमसे भी बात कर लिया करो। आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो तो तितली ने कहा, मेरे पास फालतू का समय नहीं है जो मैं तुमसे बात करूं। मेरा रास्ता रोकने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई।

 मैं एक काम से सरसों के खेत में जा रही हूं। बच्चों सरसों के खेत में पीले पीले फूल होते हैं जो कि तितली को बहुत पसंद होते हैं। इसीलिए तितली घमंडी तितली सरसों के खेत की तरफ जा रही थी।


घमंडी तितली की कहानी
घमंडी तितली की कहानी


 तोते ने उसे फिर भी कहा, सावधान हो जाओ। सरसों के खेत में मकड़ी ने अपना जाल बुन रखा है। अगर तुम बाहर जाओगी तो तुम उस जाल में फंस सकती हो, लेकिन तितली तो घमंडी थी। उसने तोते की इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और उड़ते उड़ते सरसों के खेत में चली गई और सोच रही थी।

 यह तोता कौन होता है जो मुझे सलाह दे। मैं इतनी सुंदर हो। मैं कहीं भी जा सकते हो। घमंडी तितली सरसों के खेत में पहुंच गई। जहां फूल देखकर वह बहुत खुश हो रही थी और गाने गा रही थी। उस के पास ही मकड़ी ने जाला बुन रखा था जिसका उसने ध्यान नहीं किया और मकड़ी जाले में छिप कर अपने शिकार का इंतजार कर रही थी। इतने में अचानक से तितली उस जाने में फंस गई। इसी बात का तो मकड़ी को इंतजार था। बस फिर क्या था? 

तितली ने जाले से बाहर आने की बहुत कोशिश की लेकिन वह बाहर नहीं आ पाई और अब वह सोच रही थी कि मैंने तोते की बात ना मानकर मुसीबत मोल ले ली तो

 बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब कोई हमें सलाह दे तो उसके बाद अनसुनी नहीं करनी चाहिए बल्कि उसके बारे में 2 मिनट सोच कर ही फैसला लेना चाहिए। 


बच्चों अब बात तितली की चल रही है तो मैं तुम्हें एक और कहानी सुना देता हूं। तितली का संघर्ष 

एक बार की बात है? अमित और नवीन दो दोस्त पार्क में घूम रहे थे। अमित ने देखा कि एक तितली का अंडा पेड़ से लटका हुआ है। और उसके अंदर से तितली बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, लेकिन वह सफल नहीं हो पा रही। यह देखकर अमित को बहुत मजा आ रहा था। ऐसा करते-करते शाम हो गई और अमित अपने घर चला गया। 


जब अगले दिन अमित बाग में आया तो उसने देखा कि वह कितनी अभी भी प्रयत्न कर रही है, लेकिन अंडे से बाहर नहीं आ पा रही। यह सब देखकर अमित ने सोचा कि क्यों न मैं कैची लेकर इसका अंडा तोड़ दो। और? अमित ने वैसा ही किया।

 उसने कैची से जितने का अंडा काट दिया और वह तितली बार आ गई। वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था कि उसी ने बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन अब यह तितली उड़ नहीं पा रही थी। यह बात अमित को कुछ समझ नहीं आई।

 जब नवीन आया तो उसने हम हम इतने नवीन को सारी बात बताई। तब नवीन ने कहा, अरे तुम तो बेवकूफ हो। तितली जब अंडे से बाहर आने की कोशिश करती है तो उस प्रकार उसके पंख मजबूत हो जाते हैं और वह अच्छे से उड़ पाती है। यह एक प्राकृतिक तरीका है।  इसे ही तितली का संघर्ष कहते हैं। तुमने इस का अंडा तोड़कर सही नहीं किया तो


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 बच्चों को इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें संघर्ष करना बहुत ही जरूरी है और जो काम प्राकृतिक रूप से होना चाहिए, उसे कृत्रिम रूप से नहीं करना चाहिए। नहीं तो बहुत बड़े संकट में फंस सकते हैं।

 तो बच्चों को आज आपने इस कहानी में दो कहानियों का मजा लिया एक है घमंडी तितली की कहानी और दूसरी है। तितली का संघर्ष अगर कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना

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