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जादुई लिपस्टिक की कहानी Jadui Kahani

बच्चों की जादुई कहानी 


एक बार स्नेहा और नेहा नाम की दो लड़कियां रहती थी नेहा बहुत ही सुंदर थी। जबकि नेहा का रंग सांवला था। और वह बहुत सुंदर भी रही थी। ज्यादा सुंदर होने की वजह से नेहा की मां नेहा से बहुत प्यार करती थी। लेकिन नेहा को कम प्यार मिलने की वजह से नेहा हमेशा प्यार के लिए तरसती रहती थी और रोज शाम को एक पेड़ के नीचे नदी के किनारे रोया करती थी। एक दिन मैं बहुत रो रही थी। क्योंकि उसे उसे भी अपनी मां का प्यार चाहिए था तभी उसके पास एक महात्मा आए उन्होंने एक कृत्रिम लिपस्टिक उसे दी और कहा बेटा नेहा तुम मन की बहुत ही अच्छी लड़की हो तुम यह लिपस्टिक यूज करना।


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जादुई लिपस्टिक 


और यह जरूर याद रखना कि अगर यह लिपस्टिक तुम लगाओगे तो तुम सुंदर बन जाओगे परंतु अगर इस लिपस्टिक का प्रयोग किसी और ने किया तो यह इसका विपरीत असर दिखाएगी और यह कहकर वह साधु जी गायब हो गए। जैसे ही वह लिपस्टिक नेहा ने लगाई वह लड़की बहुत ही सुंदर दिखने लगी और जैसे ही वह घर गई तो उसकी बहन स्नेहा और उसकी मां उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गई तब उसकी मां ने और उसकी बहन स्नेहा ने उससे पूछा अरे तुम इतनी सुंदर कैसे हो गई तो नेहा ने साधु की सारी बात बता दी परंतु वह खुशी खुशी में लिपस्टिक किसी और के प्रयोग करने पर उसके विपरीत परिणाम के बारे में बताना भूल गई और जैसे कि नेहा बहुत खुश थी वह बहुत सुंदर दिखाई दे रही थी।

 वह जाकर अपने कमरे में सो गई अब स्नेहा को नेहा से जलन होने लगी वह सोचने लगी कि मैं उस लिपस्टिक कोई प्रयोग करके और सुंदर बन जाऊंगी और वह चुपके से नेहा के कमरे में गई और उस लिपस्टिक को चुरा लिया और वह लिपस्टिक जैसे ही उसने अपने होठों पर लगाई वह। बड़ी ही बदसूरत हो गई और वह बहुत जोर जोर से रोने लगी रोने की आवाज सुनकर नेहा जग गई उसकी मां भी भागी भागी नेहा के कमरे में आई और उन्होंने देखा कि स्नेहा तो बहुत ही बदसूरत हो गई है तब नेहा के पूछने पर स्नेहा ने पूरी कहानी बताई कि मैं और ज्यादा सुंदर होने की वजह से तुम्हारे कमरे में तुम्हारी लिपस्टिक चुराने आई थी लेकिन देखो तुम्हारी लिपस्टिक ने मेरा क्या हाल कर दिया तब नेहा ने बोला कि मैं तुम्हें शाम को यह बताना भूल गई कि इस लिपस्टिक को सिर्फ मैं ही प्रयोग कर सकती हूं।

 अगर इसका प्रयोग मेरे अलावा कोई और करेगा तो इसका असर विपरीत होगा और यह बात सुनते ही उसकी मां और उसकी बहन ने स्नेहा दोनों ही बड़ा गुस्सा हो गई और साथ में रोने भी लग गई फिर दोनों के दोनों। नेहा के साथ में उस पेड़ के नीचे गई जहां पर वह साधु नेहा से मिला था तो वहां जाने के बाद में नेहा जोर-जोर से साधु को बुलाने लगी रोने लगी कि साधु जी कृपया करके उपस्थित हो मेरी मदद करें मेरी मदद करें तभी साधु वहां आए उन्होंने कहा नेहा क्या हुआ बेटी तो उन्होंने उसने सारा वृत्तांत साधु जी को सुनाया और कहा कि साधु जी कृपया करके मेरी बहन को पहले जैसा कर दीजिए मुझे यह लिपस्टिक नहीं चाहिए।

अगर यह लिपस्टिक मैंने अपने पास रखी तो मैं इसकी देखभाल नहीं कर पाऊंगी। कृपया यह लिपस्टिक आप ले लीजिए तो साधु जी ने बताया अगर मैं यह लिपस्टिक वापस ले लूंगा तो तुम पहले जैसी ही हो जाओगी तुम खूबसूरत नहीं रहोगी तो नेहा ने हंसते हुए कहा साधु जी मैं जैसी हूं वैसी ही रहने में खुश हूं कोई बात नहीं आप ही लिपस्टिक ले ले। लेकिन मेरी बहन को पहले जैसा कर दीजिए और मुझे भी यह कहते ही साधु जी ने वह लिपस्टिक वापस ले ली और साधु जी लिपस्टिक लेकर गायब हो गए साधु जी के गायब होते ही स्नेहा पहले की तरह खूबसूरत हो गई और नेहा पहले की तरह बदसूरत लेकिन अब वह खुश थी और उसकी मां भी खुश थी कि नेहा ने अपना स्वार्थ ना देखते हुए अपनी बहन की खूबसूरती उसे वापस दिलाई थी। अब नेहा की मां उसने अब नेहा से भी प्यार करने लगी अब तीनों खुशी-खुशी रहने लगे

 तो बच्चों आपने इस कहानी से आपने क्या सीखा जो आपके पास है उसकी इज्जत करनी चाहिए और उससे प्यार करना चाहिए धन्यवाद।

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