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घमण्डी जादुई पेंटिंग की कहानी Jadui Kahaniyan

किसी गांव में एक दुकान पर बहुत ही खूबसूरत पेंटिंग थी। वह पेंटिंग  इतनी खूबसूरत थी कि शाम को लोग वहां इकट्ठा होकर उस पेंटिंग के नजारे देखने आते थे। उस पेंटिंग के अंदर एक कृत्रिम सदृश्य नजर आता था जिसके अंदर एक राजकुमारी बनी हुई थी।

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जादुई पेंटिंग


 उस राजकुमारी की सुंदरता इतनी प्रसिद्ध थी इतनी विख्यात थी कि लोग उसके सुंदरता देखते ही रह जाते थे। दूर-दूर से लोग वहां आते पेंटिंग को देखते नजर भर कर और वापस चले जाते रोज यही लगा रहता राजकुमारी थी तो बहुत ही सुंदर परंतु जब वह तस्वीर मैं उपस्थित बाकी सभी प्राकृतिक चीजों जैसे उसके अंदर बनी हुई लालटेन पर्वतों पहाड़। पेड़ आदमियों से बातें करते टाइम बोलती थी मैं इतनी खूबसूरत हो इसी वजह से लोग मुझे देखने आते हैं तुम सब लोगों की सुंदरता तो मेरे सामने कुछ भी नहीं है।

 मैं बहुत सुंदर हूं इसीलिए मुझे देखने आती है। यह सब बातें सुनते सुनते पहाड़ अपने फिर स्वभाव की वजह से कुछ बोल कुछ बोला नहीं फिर भी उसकी बातें सुनकर हंस मुस्कुराने लगा परंतु लालटेन जो कि स्वभाव से ही जलने का प्रतीक है। उसकी बातों को सुनकर बहुत ही गुस्सा हो गया और उसने गुस्से में आकर बोला कि अगर मैं ना हो तो तुम्हारा होना बेकार है तो इस बात पर राजकुमारी गुस्सा होकर बोलती है कि तुम क्या कर सकते हो? तुम्हारा तो कोई अस्तित्व ही नहीं है।

 मैं बहुत सुंदर हूं इसी वजह से लोग मुझे देखने आते हैं तो लालटेन को बहुत गुस्सा आता है कि देखना एक दिन मैं करके दिखाऊंगा कि मैं क्या कर सकता हूं। कुछ दिन गुजर जाते हैं। लालटेन का गुस्सा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा था घमंडी राजकुमारी। प्रतिदिन अपनी सुंदरता का वाक्य व्याख्यान करती रहती थी। एक दिन क्या हुआ लो और दिनों की अपेक्षा बहुत ज्यादा भीड़ लगी हुई थी और लालटेन ने अपनी लाइट ही नहीं जलाई जिसकी वजह से लोग वहां इकट्ठा तो हुए परंतु कोई भी इंसान तस्वीर को देख नहीं पाया और जिसकी वजह से सभी लोग वापस चले गए। 

उस दिन राजकुमारी को यह आभास हुआ कि हर वस्तु की अपनी एक कीमत होती है। हर वस्तु का अपना एक अस्तित्व होता है लालटेन के न जलने से उसकी सुंदरता को कोई नहीं देख पाया उस दिन उसे आभास हुआ कि हमें हर चीज की इज्जत करनी चाहिए

 तो बच्चों आपने कहानी से क्या सीखा कि हर चीज का अपना एक अस्तित्व होता है हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए धन्यवाद।


जादुई तोता


 एक गांव में एक गरीब लकड़हारा माधव अपनी पत्नी और एक बेटे के साथ रहता था जंगल से लकड़ियां काटकर उन्हें बाजार में बेचकर ही अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उसका छोटा घर, टूटी खाट, गिने-चुने पुराने कपड़े और दो चार बर्तन ही उसकी गरीबी के साथ थे। माधव अपनी पत्नी को कहता है  "पप्पू की मां आजकल बाजार में लकड़ियों के अच्छे भाव नहीं मिल रही है। दुकानों में लोग ऊंचे दाम में भी सामान खरीद लेते हैं। लेकिन हम गरीबों की लकड़ियों का बड़ा मोल भाव करते हैं। हमारे परिश्रम का कोई महत्व नहीं रह गया है।"

 "आप सच कह रहे हैं गरीबों की कोई कदर ही नहीं है।" पत्नी ने कहा

              माधव दुखी होकर अपनी खटिया पर बैठा था और उसकी खिड़की पर एक और सुंदर प्यारा तोता कर बैठ गया है।


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माधव और तोता 

 मिट्ठू भाई लगता है बहुत भूख लगी है। मैं कुछ लेकर आता हूं। प्यारा तोता बड़ी आशा भरी नजरों से माधव को देख रहा था माधव दो लाल मिर्च और एक अमरुद एक छोटे से बर्तन में लेकर आया और खिड़की पर रख दिया तोता बहुत खुश हो गया और प्यार से खाने लगा।



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तोता और लाल मिर्च 


    पप्पू ने कहा  "कितना प्यारा तोता है इसे तो हमारे पिंजरे में होना चाहिए" नहीं बेटा इन्हें पिंजरे में कैद नहीं करना चाहिए। यह आजाद पंछी है ना और आजादी पसंद है तोते ने अमरूद और लाल मिर्च खा लिए थे। वह अपनी आंखें मटका कर माधव को धन्यवाद दे रहा था

 वह प्यारा तोता प्रतिदिन माधव की खिड़की पर आने लगा लाल मिर्च अमरूद खाने लगा उसने माधव और उसके परिवार से बड़ा ही लगाव हो गया था। अब तो वह घर के अंदर भी आ जाता था। पशु-पक्षी भी प्यार की भाषा समझते हैं। "कैसे हो मिट्ठू" तोता ने कुछ बोला मानो कह रहा हो बहुत अच्छा हूं वह प्यार से कभी माधव के कंधे पर बैठ जाता कभी पप्पू के सर पर

 एक दिन उड़ कर रसोई में पप्पू की मां के पास भी पहुंच गया। क्या बात है? मीठी रोटी खाओगे ? तोता उड़ा और बेटे के डिब्बे पर जाकर बैठ गया उस डिब्बे में थोडा आटा था इसी तरह वह बारी-बारी से गेहूं चावल और दाल के डिब्बे पर बैठता जा रहा था।

 इसके बाद वह एक बक्से पर जा बैठा फिर पप्पू की मां के कंधे पर आकर बैठ गया 


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माधव की पत्नी 


मेरे मिट्ठू आज बहुत उछल कूद कर रहे हो। ऐसा लगता है बहुत खुश हो गए हो, क्या रे? तोते ने हामी में सिर हिलाया फिर अपने पंख फड़फड़ा और उड़ गया

 माधव की पत्नी सब रोटियां बना चुकी तब उसने बचा हुआ सूखा आटा रखने के लिए जब आटे वाला डब्बा खोला, उसकी आंखें खुली की खुली रह गई आटे का पूरा डब्बा खचाखच भरा हुआ था। जब उसने गेहूं चावल और दाल के डिब्बो को खोलकर देखा तो वे सब पूरी तरह से भरे हुए थे                                                   


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धन का बक्शा 



वह अपने बक्से में कुछ सामान रखने के लिए गई, तब उसने देखा पूरा बक्सा धन-दौलत सोने चांदी से भरा हुआ था। वह खुशी से चकरा गई उसे यह बात समझने में जरा भी देर सारे चमत्कार उसी प्यारे तोते ने किए हैं।

पप्पूने कहा "मम्मी मम्मी यह तो बहुत बड़ा जादू है चमत्कार है" पप्पू के बाबूजी जल्दी आइए देखें हमारे प्यारे तोते ने हमारी गरीबी को दूर भगाकर कमाल कर दिया है और यह तो कमाल हो गया हमारा मित्र तो हमारा भगवान बन गया।

 इसके बाद मिट्ठू 2 दिन तक उनके घर नहीं आया इंतजार करते रहते तीसरे दिन सवेरे माधव घर से लकड़ियां काटने के लिए निकला रास्ते में उसे मिट्ठू की आवाज सुनाई पड़ी और चारों तरफ देखने लगा मिट्ठू की आवाज जिस तरफ से आ रही थी बाद अब उसी दिशा में जा रहा था एक घर के कमरे में पिंजरे में मिट्ठू दिखाई पड़ा माधव को देखकर बहुत जोर जोर से पंख फड़फड़ाने लगा मानो अपने पास बुलाने लगा

 अरे तुम्हें पिंजरे में किसने कैद किया? तुम चिंता मत करो, मैं आया हूं तुम्हें आजाद कराने के लिए पिंजरे के मालिक संजय से बात की भाई साहब यह मेरा मिट्ठू है इसे पिंजरे से निकालो यह मेरा तोता है जिसे मैं किसी को नहीं दूंगा 

संजय की पत्नी ने कहा "जब से आपने इस तोते को पिंजरे में कैद किया है।  बुरा छोड़, कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है कि माधव का तोता है उसे दे दो" संजय ने कहा "मैंने उसे पकड़कर पिंजरे में रखा है यह मेरा तोता है किसी को नहीं दूंगा" बहुत से लोग इकट्ठा हो गए माधव और संजय दोनों ही मिट्ठू पर अपना अधिकार जमा रहे थे

 वहां एक साधू पधारे सब की बात सुन ली और कहा "इस पिंजरे का दरवाजा खोलिए" संजय और माधव दोनों जन इसे अपने पास बुला रहे थे पिंजरे का दरवाजा खुला। तोता संजय के सर पर मंडराने लगा संजय ने उसे अपने पास बुलाया लेकिन तोता गोल गोल घूमकर संजय के कान के पास से निकल कर माधव के कंधे पर जा बैठा। 



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माधव और तोता 


माधव बड़े प्यार से तोते को सहलाने लगा तोता भी खुश हो गया 
यह साबित हो चूका था की तोता माधव का है माधव तोते को लेकर   घर की ओर चल पड़ा उसकी पत्नी और उसके बच्चे ने जब मिट्ठू को देखा तो सभी खुशी से झूम उठे।




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