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अकबर बीरबल की 2 कहानियाँ - लहरे गिनना और तीन सवाल

आज हम आपको २ कहानियाँ सुना रहे हैं ये दोनों कहानियाँ अकबर बीरबल की कहानी हैं - लहरे गिनना और तीन सवाल


akbar birbal ki kahaniyan
अकबर बीरबल


लहरे गिनने का काम


 1 दिन बादशाह अकबर के महल में एक आदमी आया और महाराज से विनती करने लगा कि महाराज मुझे कोई नौकरी दे दो। 

तो उसको दुखी देखकर महाराज अकबर ने उसे नौकरी दे दी उसे चुंगी का अधिकारी बना दिया चुंगी एक प्रकार का कर होता था जो बहुत पहले लगा करता था यह सब देख कर, बीरबल बोले महाराज मुझे यह आदमी ठीक नहीं लग रहा यह बहुत चालाक दिखाई देता है उसे चुंगी अधिकारी नहीं बनाना चाहिए था

 चलो कोई बात नहीं अब बना दिया तो इसको बाद में देख ले गए। थोड़े दिनों के बाद बीरबल की बात सच हो गई। उस आदमी की शिकायत आने लगी कि वह लोगों से रिश्वत लेता है। 

यह सब देखकर महाराज ने उसका तबादला घोड़ों के अस्तबल में कर दिया या उसको घोड़ों की लींद उठाने थी लींद उठाकर बेचने थी। 

यहां पर भी उसने अपनी बेईमानी शुरू कर दी। वह घोड़ों को भोजन खिलाने वालों को बोला कि महाराज ने मुझे घोड़ों की लींद तोलने के लिए कहा है तुम घोड़ों को खाना कम खिलाते हो। इससे डरकर उन्होंने भी इसको ₹5 प्रति घोडा देना शुरू कर दिया। इस प्रकार यह आदमी बेईमानी करने लगा इसकी शिकायत भी महाराज के पास पहुंच गई। 

अब महाराज ने उसका तबादला समुद्र किनारे कर दिया यहां पर उसको लहरें गिननी थी महाराज ने सोचा कि अब बेईमानी करने का कोई जुगाड़ नहीं हो पाएगा लेकिन यह तो बहुत ही चलाक था इसने यहा भी बेईमानी शुरू कर दी। इसने नाव वालों को बोला कि तुम रुको मुझे लहरें गिन्नी है इस प्रकार नव वालों के दो-तीन दिन तक रुकना पड़ता था।

 इससे परेशान होकर उन्होंने भी इस को रिश्वत देना शुरू कर दिया। इस प्रकार यहा भी बेईमानी कर दी। जब इसकी शिकायत महाराज के पास पहुंची और महाराज ने एक बोर्ड पर लिखवा कर भेजा नाव को रोको मत, जाने दो लेकिन इस व्यक्ति ने , (Comma) को बदल दिया उसने लिख दिया नाव को रोको, मत जाने दो 

आखिर में इससे परेशान होकर महाराज अकबर ने इसको सेवा से हटाना पड़ा


शिक्षा: इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती हैं की हमे ईमानदार बनना चाहिये





तीन सवाल



बच्चों जैसे की आप सभी को पता ही है बीरबल बहुत चालाक व्यक्ति था लेकिन राजा के दरबार में कुछ लोग उससे ईर्ष्या करते थे। 1 दिन कुछ लोग राजा से बोले कि बीरबल चलाक नहीं यदि वह हमारे तीन प्रश्नों का जवाब दें तो हम उसे चलाक समझेंगे नहीं तो उसे अपनी नौकरी को छोड़ना पड़ेगा 

इस पर राजा ने बीरबल से पूछा बताओ बीरबल क्या तुम्हें यह सवाल मंजूर है बीरबल ने कहा ठीक है महाराज सवाल पूछो तो लोगों ने पूछा

आसमान में कितने तारे हैं? 

धरती का केंद्र कहां है? 

इस संसार में कितने पुरुष और कितनी महिलाएं है?

            यह सुनकर बीरबल ने शर्त स्वीकार कर ली। अगले दिन बीरबल को इनके जवाब देने थे तो अगला दिन हुआ बीरबल और सभी दरबारी दरबार में पहुंचे। बीरबल ने अपना पहला जवाब दिया। बीरबल एक भेड़ लेकर आया। उसने कहा जितने इस बैड के शरीर पर बाल है उतने ही आकाश में तारे हैं जिसे यकीन ना हो वह इनको गिन सकता है।

 दूसरे सवाल के जवाब में बीरबल ने लोहे की रॉड से दो रेखाएं खींच दी और उनके बीच में उस राड़ को गाड़ दिया। और कहां धरती का केंद्र इतना ही दूर है। जितना यह डंडा।

 तीसरा सवाल का जवाब देना थोड़ा कठिन है क्योंकि हमारे दरबार में कुछ लोगों का पता नहीं वह पुरुष है या महिला अगर उनको मार दिया जाए तो इस प्रश्न का जवाब भी दे सकता हूं। यह सुनकर राजा अकबर हंसने लगे और वह दरबारी डर गए और समझ भी गए कि बीरबल का इशारा होने की तरफ है। 


शिक्षा बच्चों हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि अगर चाहे तो इस संसार में कोई भी सवाल ऐसा नहीं है। जिसका हम अपनी सूझबूझ से जवाब दे सके 

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