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महाभारत के अनसुने किस्से कहानियाँ

महाभारत के अनसुने किस्से कहानियाँ युधिष्ठिर का यग

आज महाभारत के किस्से में से एक कहानी - एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने बड़े विधि विधान से एक महायज्ञ का आयोजन किया यह पूरा होने के बाद उसमें दूध की आहुति दी गई लेकिन आकाश से घंटियों की आवाज नहीं सुनाई पड़ी उस समय में ऐसा माना जाता था कि एक के बाद आकाश से घंटियों की आवाज आनी चाहिए जब तक घंटियां नहीं बस्ती तब तक यह को पूरा नहीं माना जाता था। 

mahabharat ke kisse kahaniyan
कहानी


अब महाराज युधिष्ठिर को चिंता हुई उन्होंने भगवान कृष्ण से अपनी समस्या बताएं कृष्ण ने कहा गरीब और सच्चे दिल वाले आदमी को बुलाकर उसे खाना खिलाओ तभी तुम्हारी समस्या दूर होगी धर्मराज खुद ऐसे आदमी की खोज में निकले एक निर्धन व्यक्ति को कुटिया से खोज निकाला और अपना परिचय देते हुए कहा बाबा आप हमारे यहां भोजन करने की कृपा करें तो उसे मना कर दिया उसके बाद कुछ शंका के बाद, वह सोच नहीं पा रहा था उस जैसे मामूली आदमी को खाना खिलाने के लिए इतनी दूर से स्वयं रजा आया हैं बार बार कहने पर जाने को तैयार हो गया। 

 द्रोपती ने अपने हाथों से बड़ा ही स्वादिष्ट खाना उसे खिलाया। खाना खाने के बाद वह आदमी ने संतुष्ट होकर डकार ली जूही उसने डकार ली तो आकाश से घंटियों की आवाज आने लगी युधिष्ठिर ने कृष्ण से पूछा भगवान इस गरीब आदमी में ऐसी कौन सी खास बात है कि इसका खाना खाते ही मेरा एक सफल हो गया कृष्ण बोले आपने पहले जिन आदमियों को खाना खिलाया था उनका पेट पहले से भरा था 

उन्हें खाना खिलाना कोई खास बात नहीं थी। असली फायदा होता है जब आप भूखे को खाना खिलाएं जिसका पहले से ही पेट भरा हो उसे खाना खिलाने में जब पूरा नहीं होता तुमने एक भूखे आदमी को खाना खिलाया है तो तुम्हारे यज्ञ से देवता खुश हुए हैं तो बच्चों आज की कहानी खतम होती हैं

महाभारत का दूसरा किस्सा


 महाभारत का युद्ध चल रहा था और कोरवों की सेना पांडवों से हार रही थी तब दुर्योधन को गुस्सा आया और वो भीष्म पितामह के पास गए और उनसे कहने लगे कि आप अपनी पूरी शक्तियों से लड़ाई नहीं कर रहे हैं। यह बात विषम पितामह को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी और उन्होंने सोने के 5 तीर निकाले। और दुर्योधन को कहा कि मैं कल इन तीनों से पांचों पांडवों को मार दूंगा।

 लेकिन दुर्योधन ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया और उनसे वह पांचों देख ले लिए बोले कि मैं तुम्हें कल ही दे दूंगा और मैं तीर लेकर चले गए। यह बात श्रीकृष्ण को पता लग गई। श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि दुर्योधन ने तो में एक वर दिया था कि तुम अपनी जान बचाने के लिए कुछ भी मांग सकते हो।

 अब यही समय है तुम दुर्योधन से वो पांचो तीर मांग लो नहीं तो उन तीनों से तुम्हारा बचना मुश्किल है। अर्जुन ने श्रीकृष्ण की बात मानी और दुर्योधन के पास जाकर वो 5 तीर मांग लिए। दुर्योधन ने भी क्षत्रिय होने के नाते अपना वचन निभाया और वे पांचों तीर अर्जुन को दिए दिए। 

एक और किस्सा कहानी


 जब पांडवों के पिता पांडू मरने वाले थे तो उन्होंने अपने पांचों पुत्रों को बुलाया और कहा कि तुम मेरा! मस्तिष्क खा लेना तुम ज्ञानवान बन जाओगे। लेकिन यह बात किसी भी पुत्र ने नहीं मानी। सिर्फ सहदेव ने ही उनकी बात मानी और उनके मरने के बाद उनका मस्तिष्क खा लिया। मस्तिष्क की पहली वाइट खाने के बाद उन्हें भूतकाल में गठित सभी घटनाओं का ज्ञान हो गया। दूसरी बाइट में उन्हें वर्तमान में क्या चल रहा है, यह सब ज्ञान हो गया और तीसरी बाइट खाने के बाद सहदेव को यह भी पता लगने लगा कि भविष्य में क्या होने वाला है। इसीलिए सहदेव को सबसे समझदार माना जाता है। 



महाभारत की अनसुनी कहानी


                  अर्जुन के पुत्र अर्विन ने ही अर्जुन की जीत के लिए अपनी बली दी थी। लेकिन उनकी यह इच्छा थी कि मरने से पहले वह शादी कर ले लेकिन कोई भी लड़की की शादी के लिए तैयार नहीं हुई। जब लड़की को पता हो कि शादी करते ही उसके पति की मृत्यु हो जाएगी तो ऐसे में कौन लड़की शादी करेगी तब श्रीकृष्ण ने लड़की का रूप बनाया और अर्विन से शादी की और उनके मरने के बाद रोए भी।

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