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Hindi Story - भोड़िये का जाल की कहानी

भेड़िये के जाल की कहानी


किसी जंगल में एक भेड़िया रहता था और अपना शिकार खुद करता था। उसे खरगोश का शिकार बहुत पसंद था। उसकी जब शिकार करने की इच्छा होती, वह चुपचाप एक पेड़ के पीछे बैठ जाता। उसे जैसे ही कोई खरगोश दिखाई देता, वह झपटकर उसे पकड़ लेता।

एक बार भेंड़िया बीमारी से कमज़ोर हो गया। कमज़ोरी के कारण वह धीरे-धीरे चल पाता था। उसकी शिकार की इच्छा होती थी, परंतु वह दौड़कर शिकार को पकड़ने में असमर्थ था। उसने दो-तीन बार पेड़ के पीछे छिपकर अपने शिकार पर झपटने की कोशिश की थी, परंतु खरगोश के बच्चे भी उससे आगे निकल जाते।

baccho ki kahani
बच्चों की कहानी 


वह दो-तीन कदम चलने पर ही थक जाता और ललचाई नज़रों से अपने शिकार को जाते हुए देखता रहता।


भेड़िये को कई दिन से खाना नहीं मिला था। वह भूख से व्याकुल था। मजबूरी में उसे एक शेर का छोड़ा हुआ बासी भोजन खाना पड़ा। भेड़िये को ताज़ा भौजन खाने की आदत थी, उसे बासी भोजन पसंद नहीं आया। वह ताज़ा भोजन प्राप्त करने का उपाय सोचने लगा। तभी उसने पेड़ पर मकड़ी का एक जाला देखा। उसने फ़ैसला किया कि वह भी अपने शिकार को फँसाने के लिए ऐसा ही कोई उपाय करेगा।


भेड़िये ने रस्सियों का एक जाल बनाया और उसे पास-पास खड़े दो पड़ों से बाँध दिया। उसने जाल को छिपाने के लिए उसे पेड़ की टहनियों और पत्तों से ढक दिया। अब वह निश्चित था। उसने सोचा कि अब जो भी खरगोश दौड़ता हुआ यहाँ आएगा, वह इस जाल में फस जाएगा और वो उसे खा जाएगा। अब उसे भोजन की कोई कमी नहीं रहेगी।

भेड़िया चुपचाप पेड़ की ओट में बैठ गया। वह यह सोचकर खुश हो रहा था कि आज कई दिन बाद उसे ताज़ा भोजन खाने को मिलेगा। तभी उसने देखा कि आस-पास कई खरगोश घूम रहे हैं। वह बेताबी से इंतज़ार करने लगा कि अभी कोई खरगोश आएगा और जाल में फॅस जाएगा। लेकिन सुबह से दोपहर हो गई, जाल की तरफ़ एक भी खरगोश नहीं आया।

भेड़िया भूख से व्याकुल हो रहा था। दिन ढलने वाला था। भेड़िये की उम्मीद टूटने लगी थी। तभी एक खरगोश दौड़ता हुआ जाल की तरफ़ आया। भेड़िये की आँखों में खुशी की चमक उभर आई। खरगोश जाल में फॅस गया था। भेड़िया सीना तानकर जाल की तरफ़ बढ़ा। तभी खरगोश जाल से निकलकर दूसरी तरफ़ भाग गया। भेड़िया उसे पकड़ने के लिए झपटा, लेकिन जल्दबाजी में उसकी गरदन उसी के बनाए जाल में फँस गई।


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बच्चों की कहानी 


 भेड़िये ने अपनी गरदन जाल से निकालने का बहुत प्रयत्न किया, लेकिन वह जितना अधिक प्रयत्न करता, उतना ही जाल में उलझता जाता। उसने कभी नहीं सोचा था कि जो दूसरों के लिए जाल बिछाता है, वह खुद भी
उस जाल में फँस सकता है।

भेड़िया पूरी रात जाल में फँसा रहा। सुबह" होने से पहले ही, उसकी मौत हो गई।


Baccho ki kahani अब, आपकी बारी :-

बताइए:-


1. भेड़िये को किसका शिकार बहुत पसंद था?
2. भेड़िये को कैसा भोजन खाने की आदत थी?
4. भेड़िये की गरदन कहाँ फँस गई थी?
5. भेडिये की मौत कैसे तथा कब हुई?
6. इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?


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